सोमवार, अप्रैल 09, 2007

चिट्ठेकारी सम्मोहक आत्ममुग्धता की जनक

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    चिट्ठेकारी के दस साल पूरे होने पर काफ़ी कुछ लिखा जा रहा है । करीब सात करोड़ चिट्ठों के अस्तित्व में होने का मौजूदा अनुमान है और उन पर करीब पन्द्रह लाख प्रविष्टियाँ हर रोज़ डाली जाती है । दस साल पहले न्यू यॉर्कवासी डेव वाइनरने पहली प्रविष्टि में उन वेब साइटों का जिक्र किया था जिन पर उस दिन वह गया था ।ब्लॉग शब्द करीब दो साल बाद आया लेकिन वाइनरकी प्रविष्टी को चिट्ठाकारी की पैदाइश की तारीख मानते हुए दुनिया में कई जगह पिछले हफ़्ते चिट्ठेकारों ने दस साल पूरे होने के आयोजन किए ।

    चिट्ठेकारी का शौक ब्लॉगर.कॉम के १९९९ स्थापना के बाद बढ़ने लगा । टेक्नोरैटी के प्रमुख डेव सर्फ़ी के अनुसार दुनिया भर में रोजाना करीब १२०,००० नए चिट्ठे बन रहे हैं, अर्थात हर पल १.४ चिट्ठे । टेक्नोरैटी के आँकड़ों के अनुसार दो तिहाई प्रविष्टियाँ जापानी और अंग्रेजी में होती हैं । ज्यादातर चिट्ठों पर आने वालों का समूह बहुत छोटा होता है परन्तु कुछ वाकये ऐसे भी हुए हैं जब चिठों की प्रविष्टियाँ अन्तर्राष्ट्रीय सुर्खियों में रहीं हैं।इरान और चीन जैसे मुल्कों में प्रतिपक्ष और बदलाव की आवाजें भी इनके द्वारा मुखरित हुई हैं ।
    चिट्ठेकारी का चिन्ताजनक पक्ष प्रस्तुत करते हैं एन्ड्र्यू कीन जैसे शक्स । डॉट कॉम से जुड़े रहे एन्ड्र्यू की किताब Cult of the Amateur : How Today's Internet is Killing Our Culture आगामी जून माह में छप कर आयेगी ।उनके अनुसार, 'चिट्ठेकारी का सम्मोहन लोगों में यकीन पैदा कर देता है कि उनके पास बताने के लिए काफ़ी कुछ है जो रुचिपूर्ण भी है , दरअसल ऐसा होता नहीं है ।लोग खुद से खुद के बारे में बतियाते-बतियाते आत्ममुग्धता के शिकार हो रहे हैं ।'

[ गार्जियान अखबार में बॉबी जॉनसन के आलेख पर आधारित ]

3 टिप्‍पणियां:

  1. it is true about you. you think that you have a lot to tell the people.
    so it is a good book for you to read and understand.

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  2. हमने सुबह टिप्पणी की थी, कहाँ गायब हो गई.. :(

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