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मंगलवार, अगस्त 15, 2006

आगाज.

साधारणतया मौन अच्‍छा है,
किन्‍तु मनन के लिए .
जब शोर हो,
चारो ओर सत्‍य के हनन के लिए,
तब तुम्‍हे अपनी बात ज्‍वलन्‍त शब्‍दों में कहनी चाहिए.
सिर कटाना पडे या न पडे,
तैय्‍यारी तो उसकी रहनी चाहिए .
--भवानी प्रसाद मिश्र