मंगलवार, दिसंबर 12, 2006

राधा - कृष्णों की फजीहत

गनीमत है कि द्वारिका मोदी के गुजरात में है, मथुरा या बृन्दावन नहीं . मोदी का राज यदि मथुरा-वृन्दावन में होता तब राधा-कृष्ण का क्या हाल होता ? वह भी भारतीय संस्कृति के कथित रक्षकों के हाथों . विडम्बना है कि ‘रक्षकों’ में कुछ गोपियां भी पीछे नही हैं .
काश इन ‘संस्कृति रक्षकों’ का भीम और हिडिम्बा जैसे युगल से कभी सामना हो जाता ,तब समझ में आता.

4 टिप्‍पणियां:

  1. संजय बेंगाणी9:36 am, दिसंबर 13, 2006

    यह आपने अच्छी कही. गुजरात में हो तो 'राधा-कृष्ण' और गुजरात से बाहर ऐसी ही घटना उ.प्र. हो तब? आप अभी भुले नहीं होंगे.
    खैर अपने तो ऐसी घटनाओं की तब भी निंदा की थी आज भी करते हैं, बिना पक्षपात.

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  2. यह मोदी का राज.. मोदी का राज क्या लगा रखा है आपने???


    मोदी कोई तानाशाह नही है, जनता उन्हे ठुकरा देगी तो वे आसानी से चुनाव हारकर घर भी बैठ सकते हैं। आप तो ऐसा कह रहे हैं जैसे यहाँ जंगलराज है।

    जो भी हो जिस प्रदेश में आप निवास करते हैं उस कथित उत्तम प्रदेश से तो अच्छा है।


    आपको सडक छाप मजनुओं में कृष्ण नजर आते हैं!!!


    600 - 700 किमी दूर बैठकर संजय दृष्टि से देखने की बजाय प्रत्यक्ष में देखिए कि कौन से कृष्ण लीला कर रहे हैं।

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  3. अफलातून भाई, बुरा मत मानियेगा। परन्तु मुझे लगता है कि आप ने राधा कृष्ण एवं भीम हिडिम्बा रिश्ते को समझा नहीं। इन रिश्तों की तुलना सड़क छाप मजनुओं से करना आप जैसे जिम्मेदार व्यक्तियों को शोभा नहीं देता।
    इन संस्कृति रक्षकों की कार्य प्रणाली में दोष हो सकता है, परन्तु इनका ध्येय बुरा नहीं है। वैसे उत्तर प्रदेश में भी इस प्रकार की घटनाएं होती रही हैं, इसलिए मोदी को बीच में घसीटना नितान्त अनावश्यक एवं अन्याय है। मोदी जी गुजरात के विकास के लिए जो प्रयास कर रहे हैं, आशा है कि आप उनकी तारीफ भी अवश्य करेंगे।

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  4. आपने गलत उम्मिद लगा ली बंसलभाई.. इन कथित समाजवादीयों का एकमात्र लक्ष्य उन लोगों की बुराई करना है जो इनकी विचारधारा को नही मानते।

    मोदी खराब है तो उनको गुजरात की प्रजा जवाब देगी, बीच में इनको पता नहीं क्यों बुखार आ जाता है।

    और टेग देखी आपने - "हाफ पेंट" लगा रखी है। पहले भी आर.एस.एस. वालों को हाफ पेंट कहते आए हैं। तो खुद क्या है?

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