बुधवार, अगस्त 16, 2006

वाल मार्ट

सरकारी नीतियो के कारण बेरोजगारी है और ऐसे में माता पिता सोचते हैं कि थोडी सी पूंजी लगा कर दुकान खोल दी जाए .वाल मार्ट जैसे मगरमच्छ क्या करेंगे आपने बताया है.मुकेश अंबानी का दावा है कि वे भारतीय वाल मार्ट बनना चाहते हैं.सब्जी तक अम्बानी घर तक पहुंचाएंगे.वाम फ्रन्ट सरकार ने अम्बानी को न्योता दिया है. दुनिया के १० सबसे बडे पैसे वालों में ५ 'वॉल्टन' हैं.वॉल्टन वाल मार्ट का मालिक खानदान है.इनकी कुल दौलत ९० बीलियन डौलर है यानि बिल गेट्स और वॉरन बफेट की सम्मिलित दौलत से ज्यादा तथा सिंगापुर की राष्ट्रीय आय से ज्यादा.किसी आपूर्तिकर्ता का यदि ज्यादातर माल यदि आप ही खरीदते हैं तो सौदेबाजी से आपको माल सस्ता मिलेगा.वाल मार्ट यह ही करता है.साथ साथ मजदूरों को भी चूस कर रखता है.उन्हें स्वास्थ्य आदि कि सुविधा से मरहूम रख कर दाम सस्ता रख्ता है.सस्ता होगा यह भी भ्रम है-अरकन्सास के एक दैनिक ने ६ वाल मार्ट दुकानों की तुलना अन्य दुकानों से की तो पत चला कि १९ घरेलू सामानों में वाल मार्ट मे केवल दो सामान सबसे सस्ते थे.सभी सामानों का न्यूनतम $१२.९१ था तथा अधिकतम वाल मार्ट में $ १५.८६ था.वाल मार्ट में भेद भाव के भी अध्ययन हुए हैं.

6 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा नीजि मत हैं की यह भय कमप्युटरों के आगमन के समय जो बेरोजगारी बढ़ने का भय था वैसा ही हैं.
    महत्त्व गुणवता तथा किमंत को मिलेगा.
    अब देखिये मेरे घर के आसपास ही पाचँ मॉल हैं लेकिन सब को आजमाने के बाद सामान एक किराणे कि दुकान से खरिदने लग गये हैं क्योंकि वह सस्ता देता हैं.

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  2. समाजवादी जन परिषद जी, हिन्दी चिट्ठाकारी में आपका हार्दिक स्वागत है।

    समाजवाद एक पुनीत धारणा है, किन्तु इसे साकार करने के व्यावहारिक, कारगर और दक्ष तरीके अभी तक नहीं खोजे जा सके हैं।

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  3. बेरोजगारी तो बढ रही है,उसमें कम्प्यूटर का योगदान कितना है,उसका अध्ययन होना चाहिये.बैंक कर्मचारी बता सकेंगे कि कितने पद मौजूदा कार्यरत कर्मचरियों के अवकाश प्राप्ति के बाद नही भरे जाएंगे.उनके नेताओं ने मान लिया था कि मौजूदा लोगों को मत निकालिये,भविष्य में उनके पद समाप्त करने पर हम नही बोलेंगे .
    जैसे पुरानी सोच का अन्धविश्वास था ,'गणेशजी दूध पी रहे हैं', वैसा नई सोच वालों का अंधविश्वास है,'कम्प्यूटर से सारी समस्याएं हल हो जायेंगी'. टी.वी. जब नया था तब कहा जाता था कि इससे ग्यान का प्रसार होगा,अपसन्स्कृति का नहीं. सूचना और ग्यान को पर्यायवाची मान लिया जाता है .
    आप के पडोस का पर्चून वाला तो बकरी की मां की तरह कब तक खैर मनायेगा ? वैसे अम्ररीका के चार सबसे बडे शहरॉं में वाल मार्ट स्थानीय समुदायों के विरोध के कारण नही है.
    टिप्पणी के लिये हार्दिक धन्यवाद.

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  4. अनुनाद स्वागत के लिये आभार.
    किसी भी अवधारणा को बिना दमदार कोशिशों के साकार नही किया ज सकता.
    अवधारणा को साकार करने के व्यावहारिक, कारगर और दक्ष तरीके पानी में कूदे बिना इजाद हो जायेंगे ?
    साजिशों को अन्जाम देने के लिये भी , व्यावहारिक, कारगर और दक्ष तरीके पूरी ताकत के साथ खोजे जाते हैं.दुर्भाग्यपूर्ण तो होता है इनमें शरीक होने के बावजूद खुद को भी पता न चल पाना कि मैं शरीक हूं.

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  5. समाजवादी जनपरिषद जी,
    आपकी उम्र महज १४ साल है, हिंदी चिठ्ठों की दुनिया में आपका स्वागत है।

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  6. स्वागत के लिये आभार.

    जैसे ई-छाया की उम्र इन्टरनेट की उम्र से कम होनी चाहिये(नाम के हिसाब से),वैसे ही एक राजनैतिक दल की उम्र उसकी स्थापना तिथि से जोडी जायेगी.ठीक ?

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